विज्ञान से समाज तक
आज की दिनांक बाइस जुलाई और पूरा भारत हर्षित है चन्द्रयान -2 के सफल प्रक्षेपण के लिए यह कार्य अपराह्न तीन बजे तक सम्पन्न भी हो गया प्रत्येक भारतीय के मन मे एक नई ऊर्जा का संचार हो गया, अगर इस घटना क्रम को देखे तो सर्वप्रथम इसकी बात 2003 मे हुई और इसका पड़ाव पूरा हो गया 2008 देश के अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह जी के कार्यकाल मे चन्द्रयान-1 इसकी सफलता यह रही कि बहुत कम खर्च में चंद्रमा की सतह का अनुमान पता चला और जल की मौजूदगी का आभास अब चन्द्रयान-2 यह भी अभूतपूर्व तरीके से चंद्रमा की गतिविधियों को पता कर पायेगा और अपने मिशन को सम्पूर्ण कर लेंगा ऐसी कामना है यह भी तब जब देश मे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी जी है ।। खैर हम इसकी बात क्यों कर रहे है इसका कारण तो यह समझने का प्रयास है कि विज्ञान को पृथ्वी से आसमान की तरफ क्यों जाना पड़ रहा है, हम पचास साल पहले क्यो नही चले गए या जरूरत नही पड़ी तो इसका उत्तर आसीन है समाज में चाहें हम मंगल जाए या चन्द्रमा उसका उद्देश्य है जीवन कितना प्रायोगिक है वह पर क्यों कि धरती तो भयावह रुप मे आ चुकी है देखा जाए तो यह मिशन इतना ...