देश भक्ति
आज से सालों पहले जब पापा को पुलिस की वर्दी में सर ऊँचा कर तिरंगे को सलाम करते देखता था तो मुझे लगता था, ये तो बस उनका काम है. स्कूल में रोज़ नेशनल एंथम होता था, पर कभी लगा ही नहीं कि ये कुछ ख़ास है, जैसे ये मेरा अपना है. सच कहूं तो इंडिया की आज़ादी भी मेरे लिए हिस्ट्री का बस एक चैप्टर हुआ करती थी, उससे एक लफ्ज़ ज़्यादा मैंने कभी अपने देश के बारे में नहीं सोचा. बात 1999 की है, इंडिया क्रिकेट वर्ल्ड कप से बाहर हुई थी, तब पहली बार थोड़ा बुरा लगा था, मतलब शायद मेरे लिए "इंडिया" बस वो ग्यारह लोगों की टीम हुआ करती थी जो नीली जर्सी पहनकर हमारे लिए खेलती थी. खैर उसी साल एक और चीज़ हुई, कारगिल. ये वो दौर था, जब ज़्यादा मीडिया नहीं हुआ करता था, तो मुझे बस इतना पता था कि इंडिया और पाकिस्तान में जंग छिड़ गयी है और इंडिया के काफी सैनिक उसमे मारे जा रहे हैं. मैं काफी छोटा था उस समय, तो मुझे ये बातें न तो समझ में आती थीं, न ही कोई फ़र्क़ पड़ता था. खैर एक दिन मम्मी थोड़ी परेशान लग रही थीं तो मैंने पूछा, अरे मम्मी, क्या हो गया. उन्होंने थोड़ा सोच के कहा, कश्मीर में हालत काफी खराब हो गयी है, अगर ज़रुरत प...