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वर्तमान परिदृश्य राजनीति का

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महाभारत युद्ध मे कर्ण के बाणों से अर्जुन का रथ एक हाथ पीछे हो जाता था और जब अर्जुन बाण चलाते तो कर्ण का रथ पांच हाथ पीछे हट जाता ..  लेकिन हर बार कर्ण के सर सन्धान पर श्रीकृष्ण वाह वाह करते ... यह देख अर्जुन से रहा न गया वे पूछ बैठे कि केशव मेरे बाण उसके रथ को पांच हाथ पीछे धकेल रहे है तब तो आप कुछ नही बोल रहे है और वह मेरे रथ को सिर्फ एक हाथ धकेल पा रहा है फिर भी आप कर्ण की ही तारीफ किये जा रहे है....                श्रीकृष्ण बोले हे पार्थ.. तुम्हारे रथ की ध्वजा थामे महाबीर हनुमान जी बैठे है... तीनो लोको का भार लिए स्वयं मैं बैठा हूँ तब भी कर्ण तुम्हारे रथ को एक हाथ पीछे धकेल दे रहा है.…..जब इस रथ को हिला मात्र पाना भी किसी योद्धा के लिए संभव नही है... इससे तुम्हे कर्ण की वीरता का अनुमान लगाना चाहिए....             जब विश्व की सबसे बड़ी पार्टी अपनी पूरी चतुरंगिणी सेना के साथ अब तक के अपने सबसे स्वर्णिम दौर में  सबसे प्रतापी महारथियों के साथ पूरे दमखम से चुनाव में उतरती है... और उससे मुकाबिल है अपने इतिह...

गांधी जी

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मोहनदास कर्म चन्द्र गांधी ऐसा नाम जो अपने प्राम्भिक दिनों मे अनवरत कष्ट झेले और राष्ट्रपिता की उपाधि तक बहुमूल्य रूप में पहुचे, एक ऐसा व्यक्त्तिव साम्राजय जो पूरे विश्व की अहिंसावादी ताकतों का घोतक है, गांधी को लिख पाना आसान है लेकिन उन्हें समझना उतना ही परे हो भी क्यो न हो, गांधी को वही समझ सकता है जिसके पास सागर जैसा ज्ञान हो या वह अल्पज्ञानी, पिछले कुछ वर्षों मे गांधी के नफरत वाले सामने से वार करते है और उन्हें मारने वाले का गुणगान करते है, गांधी से मोहबत भी की जा सकती है और नफरत भी परन्तु परिस्थितियों के अनुसार, आप जाइये विसबी सदी के प्रारम्भ मे जाइये उस समय इंग्लैंड भारत पर पूरी तरह से हावी था वह पर एक नेता की जरूरत थी जो तमाम गतिविधियों को स्तरीय अवलोकन करके अपनी बात विक्टोरिया के कानों मे पहुचा सके, ब्रिटिश एक कम्पनी से पूरे राज्य की उतराधिकार घोषित कर दिया इतनी बड़ी त्रासदी से अगर लड़ पाया कोई तो वो गांधी की सोच ही थी ब्रिटिश हुकूमत ने रौलट एक्ट से आज़ादी दे दी थी जब लाखो संख्या में लोग मर रहे थे गांधी ने समझौता वादी नीति का तोड़ निकाला और अपने को आगे करके अहिंसा का मार्ग चुना औ...