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चन्द्र शेखर आज़ाद (क्रांति से आजादी)

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जब तक जिया वो.. मूछों पे ताव था, गुलाम देश में वह  एकलौता आज़ाद था....आज पंडित चन्द्रशेखर आजाद की जन्म जयंती है...उन्हें आकाश भर नमन पहुँचे...🙏 आजादी के लिये चलाये गये असहयोग आंदोलन की लहर में पूरा देश बह गया था। काशी में संस्कृत पढ़ रहे एक 14 वर्षीय छात्र ने भी इसमें अपना योगदान दिया...!! चन्द्रशेखर तिवारी नामक इस किशोर को धरना देने के आरोप में गिरफ्तार कर पारसी मजिस्ट्रेट मि. खरेघाट के अदालत में पेश किया गया, जो बहुत कड़ी सजाएँ देने के लिए कुख्यात थे। उन्होंने इस किशोर से उसकी व्यक्तिगत जानकारियों के बारे में पूछना शुरू किया, तो उसने अपना नाम 'आज़ाद', पिता का नाम 'स्वाधीन' और घर का पता 'जेलखाना' बताया..!!  मजिस्ट्रेट मि. खरेघाट इन उत्तरों से चिढ़ गए और उन्होंने चन्द्रशेखर को पन्द्रह बेंतों की सज़ा सुना दी। जल्लाद ने अपनी पूरी शक्ति के साथ बालक चन्द्रशेखर की निर्वसन देह पर बेंतों के प्रहार किए। प्रत्येक बेंत के साथ कुछ खाल उधड़कर बाहर आ जाती थी। पीड़ा को सहन कर वह बालक हर बेंत के साथ 'भारत माता की जय' बोलता जाता था..... इस पहली अग्नि परीक्ष...