समाज और युवा
एक बच्चा जब वह जन्म लेता है जन्म लेने के बाद,अपने माता पिता द्वारा संस्कारो से पुष्पित होता है धीरे धीरे नयी उम्र की पड़ाव की तरफ पहुचता है नव बालक की तरह वह विद्यालय की और बढ़ता है ऐसे ही उसके पांच फ़िर दस और युवा अवस्था को प्राप्त कर लेता है ।। जब उसकी उम्र लगभग चौदह साल की होती है उसकी आँखों मे सपने पलने लगते है उसकी कोई महँगी गाड़ी को अपनी पसन्द मानने लगता है, एक बेह्त्र्रीन कलाकार का फैन हो जाता है मतलब नयी दुनिया मे आने की दस्तक मिल जाती है इसी बीच उसमे चिड़चिड़ाहट, दंभ,घमंड की भावना ,विकृतिया, योवन,नये प्रकार के व्यसन जैसी चीजें भी आने लगती है यही पर कुछ युवा अपने को संबल देते है और जीवन को नई दिशा देते है परंतु कुछ युवा इसी उम्र मे हमेशा के लीय खो देते है और व्यसन जीवन भर के लीय उनका साथी हो जाता है ।।
खैर इन सबके बीच समाज की क्या भागीदारों होती है एक युवा के जीवन मे,समाज शब्द बहुत ही विराट है यह आपको एक अच्छा इंसान बनने के लीय प्रेरित करता है किताबे संस्मरण भूगोलिक परिस्थितिया,इतिहास् बड़े बुर्जुग की बाते समाहित होती है यह बह दौर होता है जहाँ वो सब कुछ सीखता है गांव सहर चाचा अंकल सभी रिश्ते की मर्यादा को सीखता और आत्मसात करता है ।।
फिर एक दौर आता है जिम्मेदारी का इक्कीस बाईस का दौर जहाँ कुछ ना कुछ युवा अपना लेता है जहाँ कुछ युवाओ को लंबी गाड़ी पसन्द आने लगती लाइमलाइट मे जाने का लक्ष्य हो जाता है।। वही कुछ युवा अपने को बौद्धिक रूप से मजबूत करते है और समाज मे अपनी चमक बरकरार रखते है ।। मेरा मानना है युवा वर्ग के प्रति समाज को सजग रहना चाहिये तथा जिवंत मुद्दों की तरफ मोड़ना चाहिये ।।
चूँकि युवा ही एक मात्र शक्ति है जो देश के परिवेश को बदलने का सामर्थ्य रखती है और समाज मे नवचेतना को स्फुटित करती है ।।
कहा भी जाता है - जिस ओर जवानी चलती है उस ओर जमाना चलता है।।


Bahut sahi 🙌👏
जवाब देंहटाएंसाधुवाद
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