उत्तर प्रदेश एक स्थिति

उत्तरप्रदेश जिसको सुनते भगवान श्री राम श्री कृष्ण की व्याख्या सामने आ जाती है दोनों ही विष्नु अवतारों ने उत्तर प्रदेश में अपना राज्य चलाया और राम राज्य की परिकल्पना साकार की जो की मानव मात्र के लिये आज भी कलियुगी स्वप्न है ।
बात करे 2019 लोकसभा चुनाव की उत्तरप्रदेश एक बार फिर महती भूमिका मे है सभी दलों की नजर उत्तरप्रदेश पर है, इतना ससक्त राज्य होने के बाद भी लगभग आधे से ज्यादा देश को प्रधानमंत्री देने वाला राज्य आखिर क्यों विकास की कसौटी पर सबसे पीछे है जनसंख्या के आधार पर उत्तरप्रदेश 5 बड़े देशों के बाद अपनी जगह बना लेता है ,विकास के मुद्दे पर देखे तो पहला चुनाव है जब बिजली के मुद्दे पर चुनाव नही लड़ा रहा है इसमें केंद्रीय सरकार की बड़ी भूमिका रही है इसमें कोई दो मत नही है,परन्तु अगर अवध का छेत्र छोड़ दे तो विकास के बहुत से मापदण्ड पर उत्तरप्रदेश आज भी नाजुक स्थिति मे है ,आजदी के सात दशक बाद भी उत्तर प्रदेश का एक भी जिले का औद्योगिकीकरण नही हो पाया जो की सबसे बड़ी समस्या और राजनितिक दलों के डूब मरने वाली बात है जो भी बड़े राज्य है उन्होंने अपने को विकसित पाया क्यों की उन्होंने अपने राजधानी जिलों को ओधगिक बनाया लोगो को रोजगार से भर दिया उद्धरण के लिये बंगलोर और हैदराबाद है लेकिन उत्तरप्रदेश के लिये ऐसा कोई विचार आज तक किया नही, उत्तरप्रदेश मे कानून व्यवस्था पर एक प्रश्न हमेशा से रहा है वर्तमान सरकार को सत्ता भी इसी मुद्दे पर सोपि गयी लगभग योगी सरकार कामयाब भी हुई है ।।
उत्तरप्रदेश का चुनाव जातियों पर अधिक लड़ा गया यह प्रदेश के लिये बहुत ही हानिकारक रहा इसलिये प्रदेश के बड़े छेत्रिय दल जाती आधारित बने और विकास के नेता कम जातियों के नेता ज्यादा उभर कर आये जिससे नोजवानो की विचारित रूप से सक्षम होने से रोक दिया गया।।।
दुःख की बात है बुन्देलखण्ड आज भी पानी से बिलबिला रहा है बहुत कुछ करने की आवश्यकता है नयी सरकार को करने आवश्यकता है तभी वह अपनी पहचान विकास के दल के रूप मे बना पायंगे ।।
प्रदेश की शिक्षा को बहुत हद तक पटरी पर लाने वाले कल्याण सिंह जी उसके बाद मुलायम जी की सरकार इन तेरह सालो मे शिक्षा व्यवस्था एकदम चौपट हो गयी अभी रिजल्ट आया जानकर ख़ुशी हुई एक खेत खलिहान की लड़की ने पूरा प्रदेश टॉप कर दिया और वह कोई वीआईपी जिले की नही वल्कि बागपत जैसे छोटे जिले सी थी शिक्षा पर सरकारी अमले का नियंत्रण शिक्षा को सही दिशा मे होना ही चाहिये ।।
ये लोकसभा चुनाव महागठबन्धन मजबूती से लड़ रहा है लेकिन वह यह चुनाव अगडा बनाम पिछड़ा बना रहा यह दुःख की बात वही कांग्रेस् भी खुद की जगह बनाने की जुगत मे अमेठी जैसी परम्परागत सीट पर भी वह संशय की स्थिति मे है बह केंद्रीय मंत्री नही वल्कि अमेठी की जनता सीधे चुनोती देने को तैयार खड़ी दिखती है चूँकि जनता ने विकास देखा ही नही होता क्या है वही भाजपा भी राष्ट्रवाद के मुद्दे और दोनों जगह सरकार होने का फायदा गिना रही है फिर भी आकलन से देखा जाये रास्ता आसान नही मुकाबला बहुत ही ज्यादा है और शिवपाल भी अपनी पार्टी से ताल ठोक रहे ये तो 23 मई बताएगा कोन कितना सफल होगा ।।
परतु प्रदेश की भलाई के लिये जाती मजहब छेत्र से उठकर जनता को भी विचार करना होगा साथ ही राजनितिक दलों को भी नही तो जनता खुद रास्ते बनाने को विवस होगी ।।
साभार शिवांक

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