आज का युवान

किसी भी घटना को देखने के लिये अब लोगो के पास वाद है उन्होंने एक विचारधारा बना ली है, सबके पास खुद के पत्रकार है वे उन्ही को सुनते क्यों कि वे उनकी विचारधारा को पुष्ट करते है, विचार होना चाहिये यह स्वीकार है परंतु विचार वाद मैं बदल रहे क्यों कि यह उनके खुद के अंतरात्मा के नही बल्कि व्हाट्सप्प यूनिवर्सिटी के संदेशों से दिमाग मे फैले है, यह वाद पहले भावात्मक रूप में धर्म जाती मजहब से जोड़ा जाता है जिससे कि उनके ह्रदय में समा जाए और दिमाग लगाने को मजबूर हो जाये, आलोचना विधा अब समाप्त हो गयी है अब बची है तो मार डालो मेरी मर्जी का नही उसे खत्म कर दीजिए यह बहुत खतरनाक है इंसानियत नही है अब वाद चल रहा है लोगो की खुद की पार्टी है वह जो कहे वही सही है आज़ादी के समय भारत में दो या तीन वाद ही चलते थे अब असंख्य है कोई भी विचारो आदान प्रदान करने मे समर्थ नही लोगो की सहनशीलता खत्म हो गयी ।।
जो सिख लिया बस वही सही और वही सही यह ज़िद है, यह भावना लोगो को खत्म कर रही है नए प्रकार का युद्ध खड़ा किया जा रहा है जब सब मारे जाएंगे और अपनी विचारधारा पुष्ट करने के लिये खुद को झूठ ही संतुलन बना रहे है ।।
युवाओ मैं अभी से पूरे मीडिया जगत मैं फैलने की इच्छा है , बिना किसी योग्यता के चैनल आवंटित कर दिया जा रहा है, पत्रकार लिखने की इच्छा जागृत हो रही है लेकिन वास्तव मे वह उस योग्यता को हासिल करने मे बहुत दूर है , नेता बनना भी आसान नही होता है उसके लिये भी ज्ञान आवश्यक है सिर्फ बहस कर लेना ही नेता का गुड़ नही होता है ।। उसके लिये भी आकड़ो के ज्ञान भी जरूरी है तो नेतृत्व की आशा अपने अंदर पल्लवित करने का साहस होना चाहिये, नेता सत्ता के अनुरूप कार्य के लिये नही होते है , खैर ट्रेंड मैं नही बहना चाहिए अपनी विचारधारा संतुलित हो परिपक्व हो समाज के लिये स्थायी हो माता पिता का नाम रोशन करने वाली हो,पढ़ी लिखी हो तब लोग आपको सुनेंगे नही तो आप अपने आप मे मरने लगेंगे जीवन भर अपने आप से समाज से लड़ते रहेंगे सावधानी आवश्यक है और आप वही करे जैसे आप अपनी संतान को देखना चाहते है ।।लवकुश तभी जन्म लेंगे जब आप भगवान राम बन पाएंगे ।।
सादर
आपका साथी शिवांक🙏

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