वर्तमान परिदृश्य राजनीति का
महाभारत युद्ध मे कर्ण के बाणों से अर्जुन का रथ एक हाथ पीछे हो जाता था और जब अर्जुन बाण चलाते तो कर्ण का रथ पांच हाथ पीछे हट जाता .. लेकिन हर बार कर्ण के सर सन्धान पर श्रीकृष्ण वाह वाह करते ... यह देख अर्जुन से रहा न गया वे पूछ बैठे कि केशव मेरे बाण उसके रथ को पांच हाथ पीछे धकेल रहे है तब तो आप कुछ नही बोल रहे है और वह मेरे रथ को सिर्फ एक हाथ धकेल पा रहा है फिर भी आप कर्ण की ही तारीफ किये जा रहे है....
श्रीकृष्ण बोले हे पार्थ.. तुम्हारे रथ की ध्वजा थामे महाबीर हनुमान जी बैठे है... तीनो लोको का भार लिए स्वयं मैं बैठा हूँ तब भी कर्ण तुम्हारे रथ को एक हाथ पीछे धकेल दे रहा है.…..जब इस रथ को हिला मात्र पाना भी किसी योद्धा के लिए संभव नही है... इससे तुम्हे कर्ण की वीरता का अनुमान लगाना चाहिए....
जब विश्व की सबसे बड़ी पार्टी अपनी पूरी चतुरंगिणी सेना के साथ अब तक के अपने सबसे स्वर्णिम दौर में सबसे प्रतापी महारथियों के साथ पूरे दमखम से चुनाव में उतरती है... और उससे मुकाबिल है अपने इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुजर रही , नेतृत्व और दिशाविहीन पार्टी , जिसने बड़े अनमने भाव से बस चुनाव लड़ लिया .... और आपका विजय रथ थम जाता है..... आप दिग्विजय की जगह किसी प्रकार सरकार बना लेने भर के हालात में हो गए ........
वैसे आपकी देहभाषा भी बता रही है की आप इसके मायने बखूबी समझ भी रहे है..... पूरे चुनाव आपका एके बार भी रोजगार , नौकरियों , अर्थव्यवस्था, अपनी प्रिय कार्यवाही सबका निजीकरण , किसानों , छात्रों , युवाओं की बात न करना इस बात की स्पष्ट ताकीद कर रहा है कि समस्या कहाँ है ... इसका बखूबी पता है आपको.... आपने असल समस्या को 370 , 35-A और पाकिस्तान की ओट से ढकना चाहा .....
आप आंशिक सफल तो अवश्य रहे तो लेकिन सनद रहे श्रीमंत कि यह आपकी सफलता नही सिर्फ और सिर्फ कमजोर और मृतप्राय विपक्ष विफलता है......
ईश्वर ने आपको देश की मूल समस्याओं को समझने और और उन पर विचार करने का सुनहरा अवसर दिया है उम्मीद है अपनी नीतियों और दशा दिशा पर आप विचार करेंगे.....
और हां सनद रहे काठ की हांण्डी बार-बार नहीं चढ़ती ... अब इस थोथे राष्ट्रवाद से इतर कोई और मुद्दा तलाशिये, क्योंकि इस राष्ट्रवाद की धार तो भोथरी हो चली है ... और हां बरायेकरम गोधरा जैसा मुद्दा न हो ये खुदा से दुआ करूंगी !!
चुनावी विजय की शुभकामनाओं के साथ...
जय हिंद🙏🏼🙏🏼
श्रीकृष्ण बोले हे पार्थ.. तुम्हारे रथ की ध्वजा थामे महाबीर हनुमान जी बैठे है... तीनो लोको का भार लिए स्वयं मैं बैठा हूँ तब भी कर्ण तुम्हारे रथ को एक हाथ पीछे धकेल दे रहा है.…..जब इस रथ को हिला मात्र पाना भी किसी योद्धा के लिए संभव नही है... इससे तुम्हे कर्ण की वीरता का अनुमान लगाना चाहिए....
जब विश्व की सबसे बड़ी पार्टी अपनी पूरी चतुरंगिणी सेना के साथ अब तक के अपने सबसे स्वर्णिम दौर में सबसे प्रतापी महारथियों के साथ पूरे दमखम से चुनाव में उतरती है... और उससे मुकाबिल है अपने इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुजर रही , नेतृत्व और दिशाविहीन पार्टी , जिसने बड़े अनमने भाव से बस चुनाव लड़ लिया .... और आपका विजय रथ थम जाता है..... आप दिग्विजय की जगह किसी प्रकार सरकार बना लेने भर के हालात में हो गए ........
वैसे आपकी देहभाषा भी बता रही है की आप इसके मायने बखूबी समझ भी रहे है..... पूरे चुनाव आपका एके बार भी रोजगार , नौकरियों , अर्थव्यवस्था, अपनी प्रिय कार्यवाही सबका निजीकरण , किसानों , छात्रों , युवाओं की बात न करना इस बात की स्पष्ट ताकीद कर रहा है कि समस्या कहाँ है ... इसका बखूबी पता है आपको.... आपने असल समस्या को 370 , 35-A और पाकिस्तान की ओट से ढकना चाहा .....
आप आंशिक सफल तो अवश्य रहे तो लेकिन सनद रहे श्रीमंत कि यह आपकी सफलता नही सिर्फ और सिर्फ कमजोर और मृतप्राय विपक्ष विफलता है......
ईश्वर ने आपको देश की मूल समस्याओं को समझने और और उन पर विचार करने का सुनहरा अवसर दिया है उम्मीद है अपनी नीतियों और दशा दिशा पर आप विचार करेंगे.....
और हां सनद रहे काठ की हांण्डी बार-बार नहीं चढ़ती ... अब इस थोथे राष्ट्रवाद से इतर कोई और मुद्दा तलाशिये, क्योंकि इस राष्ट्रवाद की धार तो भोथरी हो चली है ... और हां बरायेकरम गोधरा जैसा मुद्दा न हो ये खुदा से दुआ करूंगी !!
चुनावी विजय की शुभकामनाओं के साथ...
जय हिंद🙏🏼🙏🏼

Bahut he badhiya
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत शुक्रिया
जवाब देंहटाएंshandar
जवाब देंहटाएंBhut shandar
जवाब देंहटाएं🖐🖐
जवाब देंहटाएंThanku
हटाएंJai HinD 🙏
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