राघवेंद्र प्रताप सिंह (एक विचार)

 समाज जब जन्म ले रहा था तो बहुत सारी चुनौतियां थी, पाषाण युग से लेकर आधुनिक युग तक सभ्य समाज की ललक मै पूरा विश्व है, सारी चुनौतियों से सबसे विकराल और वीभत्स स्थति का मापदंड है गरीबी और अमीरी का भेद, यह भेद ही समाज मै अंतर पैदा करता है, जो साधन योग्य है वो साहूकार हो गया बाकी मानसिकता इतनी विकराल हो गई कि गरीब को गरीब होना ही लाजमी होता चला गया, भारत की बात करे तो आज भी लगभग अस्सी लाख लोग बिना एक समय का खाना खाए सो जाते है, आज भी गरीबी मै भारत विश्व की लगभग एक तिहाई से अधिक जनसंख्या का अधिगम बना है जो की गरीब है, ये सब आंकड़े हम क्यों





बता रहे है बताने का कारण है जिस लोकतंत्र मै देश का नौजवान अपना सर्वस्व देकर भी रोजगार की किल्लत को महसूस  करता हो जहा हर महीने आचार संहिता लगती हो सिर्फ वायदों को दोहराने के लिए, उन सबके बीच एक लोकतंत्र प्रहरी। नागरिक *भाई राघवेंद्र प्रताप सिंह* का परिचय बहुत ही संजीदा है, एक व्यक्ति से व्यक्तिव तक का सफर, छोटी सी उम्र मैं समाज को सर्व मानकर उसके लिए अपनी पूरी ऊर्जा लगा देना सब आसान नही होता, सत्य है, और सत्य को प्रमाण की आवश्यकता नही,भगवान राम ने निषाद राज को अपने बगल बिठाया और उन्हें कर्म पुरुष माना, आज के कुलीन समाज मैं भी भाई राघवेंद्र बिना किसी खीझ के समाज के हर तबके का सम्मान करते हुए अपने दायित्वों को पूर्ति कर रहे है, 

*भाई राघवेंद्र पर विशेष*

 जहा समस्या थी वह खड़े होने का साहस,नेतृत्व की अभिलाषा, बचपन से ही कुछ करने का जज्बा आपको सर्व से अधिक बना देता हैं, इतिहास मै 2020 याद रखा जाएगा, जब कोरोना काल था लोग विचार कर रहे थे क्या कैसे करना है, तब भाई राघवेंद्र ने अपने घर से ही रसोइया चला दी और निजी खर्च से गांव गांव राशन वितरण किया, खाना के पैकेट वितरण किए यह तब महत्वपूर्ण हो जाता हे,जब सासंद विधायक विचार मैं नही ला पा रहे थे करना क्या है, तब आपने दिशा दिखाई, आप कल्पना कीजिए जब नौजवान अपना जन्मदिन बनाए तो संपन्न परिवार मै होने के बाद बारकल्व मे सेंपियन के बीच रहता है, वही आप कुष्ठ आश्रम और वृद्धा आश्रम मै सम्पूर्ण भाव से अपना जन्मदिन सम्मान पूर्वक मना रहे थे,इतना ही भी ठंड जब आपको लगी तो आपने सोचा फुटफाथ पर सोने वाली दादी केसे सोती होंगी आपने विगत वर्षो मै कंबल वितरण बड़ी संख्या मैं करके गांव,गरीब,शोषित,वंचित,गांव,दलित की असल आवाज बने, चुनाव आज आप लड़ रहे इसके पीछे आपका कोई निजी हित नहीं है, क्यो की लोकतंत्र मानस भारत की प्रभुता को दर्शाता है,प्रत्येक मानव शरीर जो आपसे जुड़ा है उसने आपकी नेतृत्व की अभिलाषा को अंगीकार किया है, और हर एक युवा पीढ़ी आपने नेतृत्व को समझा है और जिया है,आपने पूरे जिले को एक नवीन ऊर्जा दी है, आप संपूर्त्व व्यक्तित्व को समाहित करने वाले है,आपकी क्रियाशीलता इस समाज को नवीन और स्पष्ट रूप देने वाली है, हर एक युवा से लेकर वृद्ध तक आपके नेतृत्व की अभिलाषी है, महादेव आपको भव्यता दे, समर्थन दे, समन्वय दे, संयोजन दे यही कामना है ।।

*जिनके कद बड़े होते है, वे बिना पद बड़े होते है* आप बड़े है, हर उस गरीब के आंखो मै जो भारत के लोकतंत्र मैं आस रखता है ।।

टिप्पणियाँ

  1. वास्तविक रूप से यह समाज के प्रति सेवा करने का भाव ही था जो पहले लॉकडाउन में राघवेन्द्र जी ने अपनी संपूर्ण ऊर्जा व अपने सीमित संसाधनों के माध्यम से बिना कोरोना संक्रमण की परवाह के लोगों के बीच भोजन वितरण करने का बीड़ा उठाया था।
    राघवेन्द्र जी रायबरेली का भविष्य है।

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